कृपया ध्यान दें: कुछ लिंक्स में जानकारी अंग्रेज़ी में हो सकती है।
छोटे-बड़े सभी बिज़नेस कई वजहों से फ्रीलांसर्स की तलाश करते हैं। आपको अपनी वेबसाइट में चार चाँद लगाने के लिए कॉपीराइटर, अपने लोगो को एक नया रूप देने के लिए ग्राफ़िक डिज़ाइनर, कोडिंग या सिक्योरिटी में मदद के लिए IT एक्सपर्ट, या फिर किसी मार्केटिंग कैंपेन को सपोर्ट करने के लिए एक अस्थायी एक्सपर्ट की ज़रूरत पड़ सकती है। आपके प्रोफ़ेशनल लक्ष्यों को हासिल करने में एक सही फ्रीलांसर कारगर साबित हो सकता है। किसी को अपनी कंपनी में स्थायी रूप से काम पर रखने की तुलना में इसमें खर्चा भी कम आता है।
अपनी सेवाओं से कमाई करने, अपनी काबिलियत के मुताबिक घंटे के हिसाब से रेट तय करने, बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ घर बैठे-बैठे काम करने, और लंबी साझेदारी में बदल सकने वाले क्लाइंट चुनने के लिए फ्रीलांस वेबसाइटें काम ढूँढने के सबसे सबसे बेहतरीन तरीकों में से एक होती हैं।
आपको समझ नहीं आ रहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स की तलाश कहाँ करें? अपनी खोज को आसान बनाने वाली बेस्ट फ्रीलांसिंग साइट्स के बारे में जानने के लिए आगे पढें।
फ्रीलांसिंग साइट क्या होती है?
फ्रीलांस साइट एक ऐसा जॉब मार्केटप्लेस और नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म होता है, जो फ्रीलांसर्स को संभावित क्लाइंट्स से जोड़ता है।
हर प्लेटफ़ॉर्म पर काम पोस्ट करने की प्रक्रिया थोड़ी अलग होती है, लेकिन ज़्यादातर साइटों पर फ्रीलांसर अपनी प्रोफ़ाइल बना सकते हैं। इस प्रोफ़ाइल के ज़रिए वे अपनी सेवाओं, पोर्टफ़ोलियो, और शुरुआती रेट की जानकारी दे सकते हैं। टैलेंट खोजने वाले लोग उनकी प्रोफ़ाइल देखकर उनसे संपर्क कर सकते हैं। वहीं, फ्रीलांसर्स की ज़रूरत रखने वाले बिज़नेस उपलब्ध जॉब पोस्ट कर सकते हैं, और इच्छुक फ्रीलांसर्स उस जॉब को देखकर प्रोजेक्ट के लिए बोली लगा सकते हैं। आपके प्रोजेक्ट या बजट के आधार पर कुछ वेबसाइटें क्लाइंट और फ्रीलांसर को अपने आप ही मैच कर देती हैं।
इस बारे में और जानने के लिए आप इस वीडियो को देख सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर सबटाइटल्स ऑन कर लें (ऑटो जेनरेट)।
फ्रीलांसिंग साइट में क्या देखें
कुछ फ्रीलांस प्लेटफ़ॉर्म जॉब बोर्ड या पोर्टफ़ोलियो साइट की तरह काम करते हैं, जबकि अन्य प्लेटफ़ॉर्म कम्युनिटी नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म या साझा वर्कस्पेस जैसे होते हैं।
अपने बिज़नेस के लिए फ्रीलांस जॉब साइट को परखते समय आपको इन बातों पर ध्यान देना चाहिए।
कम्युनिकेशन टूल्स
आपकी ज़रूरतों या पसंद के आधार पर यह देखना ज़रूरी होता है कि प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए आप किस तरह बातचीत कर सकते हैं, फिर चाहे आप क्लाइंट हों या फ्रीलांसर। अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर डायरेक्ट मैसेजिंग और ऑन-साइट कोलैबोरेशन स्पेस जैसे फ़ीचर्स को देखकर जानें कि क्लाइंट और फ्रीलांसर की बातचीत को वे कैसे सपोर्ट करते हैं।
यूज़र फ़ीस
यूज़र फ़ीस में जॉब पोस्ट करने, पेमेंट प्रोसेस करने, या फिर क्लाइंट और फ्रीलांसर के बीच साझेदारी कराने के शुल्क शामिल हो सकते हैं। कुछ प्लेटफ़ॉर्म हर जॉब पोस्टिंग या कॉन्ट्रैक्ट पर फ़ीस लेते हैं, जबकि कुछ प्लेटफ़ॉर्म एक मासिक सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करते हैं। ज़्यादातर मामलों में फ्रीलांसर फ्री में अकाउंट बना सकते हैं, लेकिन क्लाइंट से मिलने वाली पेमेंट प्रोसेस करने के लिए उन्हें सर्विस फ़ीस देनी पड़ती है। फ्रीलांसर्स के लिए यह समझना ज़रूरी होता है कि कोई प्लेटफ़ॉर्म कितनी फ़ीस लेता है, क्योंकि इसके आधार पर वे अपने रेट तय जो कर सकते हैं।
उपलब्ध सेवाओं का दायरा
यहाँ विविधता का मतलब अनुभव के स्तर, लोकेशन, या क्षेत्रों में मिलने वाले अलग-अलग विकल्पों से है। किसी साइट पर कई तरह की सेवाएँ उपलब्ध हों या फिर वे जानबूझकर किसी खास फ़ील्ड पर ही केंद्रित हों, उसका दायरा क्लाइंट या फ्रीलांसर की ज़रूरतों से मेल खाना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर आप एक कॉपीराइटिंग के साथ ब्रांड डेवलपमेंट और क्रिएटिव डायरेक्शन भी करते हैं, या फिर वीडियो प्रोडक्शन में एक फ़ोटोग्राफ़र के तौर पर आपको अच्छा-ख़ासा अनुभव है, तो कोई ऐसा प्लेटफ़ॉर्म चुनें, जहाँ आपको अपनी विशेषज्ञताओं के मुताबिक प्रोजेक्ट मिल सकें या आप अलग-अलग क्षेत्रों में काम पोस्ट कर सकें।
पेमेंट सिक्योरिटी
फ्रीलांसर्स के लिए समय पर सुरक्षित ढंग से पेमेंट मिलना बहुत ज़रूरी होता है। कुछ फ्रीलांस प्लेटफ़ॉर्म प्रोजेक्ट स्वीकार होने के बाद क्लाइंट की पेमेंट को एस्क्रो में रख लेते हैं। इससे काम पूरा होने पर पैसे मिलने में कोई देरी नहीं होती। वहीं, कुछ प्लेटफ़ॉर्म क्लाइंट और फ्रीलांसर को तय समय-सीमा पर सुरक्षित ढंग से पैसों का लेन-देन करने की सुविधा देते हैं।
आमतौर पर प्लेटफ़ॉर्म पर सिक्योरिटी बैज और सुरक्षा स्टैंडर्ड के पालन से जुड़े दूसरे संकेत देखें। सुरक्षित कनेक्शन की पहचान के लिए URL के पास बने ताले के निशान पर भी ध्यान दें। आपको यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि प्लेटफ़ॉर्म सभी पेमेंट अपने सिस्टम के ज़रिए पूरी कराता हो और इस काम के लिए WhatsApp या टेक्स्ट मैसेज जैसे बाहरी माध्यमों पर निर्भर न रहता हो।
विश्वसनीयता
किसी भी सार्वजनिक मार्केटप्लेस की तरह, यहाँ भी फ़र्ज़ी जॉब लिस्टिंग, स्पैम, और फ़ेक रिव्यू से सावधान रहना ज़रूरी होता है। आप जिस भी प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करने के बारे में सोच रहे हैं, उसके बारे में बाहरी रिव्यू साइट्स पर जाकर और जानकारी पाएँ। इस तरह प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद लिस्टिंग की क्वालिटी और विश्वसनीयता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
चाहे आप किसी फ्रीलांसर को काम पर रखना चाहते हों या किसी जॉब लिस्टिंग के लिए अप्लाई कर रहे हों, संदिग्ध मैसेज या अनुरोध, मुमकिन न लगने वाली पेमेंट, वेरीफ़ाई न किए गए पेमेंट मेथड, और अस्पष्ट जॉब डिस्क्रिप्शन या फ्रीलांसर प्रोफ़ाइल से सावधान रहें।
7 सबसे बेहतरीन फ्रीलांस मार्केटप्लेस
- Fiverr (फ़ाइवर)
- Toptal (टॉपटाल)
- Upwork (अपवर्क)
- 99designs (99डिज़ाइन्स)
- Truelancer (ट्रूलांसर)
- Guru (गुरु)
- Freelancer.com (फ्रीलांसर डॉट कॉम)
फ्रीलांस मार्केटप्लेस की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनके ज़रिए स्वतंत्र प्रोफ़ेशनल सीधे जॉब ढूँढकर अपनी शर्तों पर अपना करियर बना सकते हैं। वहीं, स्थायी कर्मचारी नियुक्त किए बिना अपनी छोटी-मोटी ज़रूरतों के लिए कंपनियों को भी एक सही प्रोफ़ेशनल मिल जाता है।
ये प्रोजेक्ट-आधारित प्लेटफ़ॉर्म अपने आप में एक बड़ा बाज़ार बन चुके हैं। The Business Research Company (द बिज़नेस रिसर्च कंपनी) के अनुसार, फ्रीलांस प्लेटफ़ॉर्म बाज़ार के 2029 तक बढ़कर 16.76 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। इस बढ़ोतरी में योगदान देने वाले कुछ प्रमुख मार्केटप्लेस हैं:
Fiverr (फ़ाइवर)
Fiverr (फ़ाइवर) पर सेलर (जॉब खोजने वाले), बायर (कंपनियाँ), और गिग्स होते हैं। इन गिग्स में एक बार के काम से लेकर लंबे समय तक चलने वाली पार्टनरशिप तक शामिल हो सकती है, जिनसे फ़ुल-टाइम फ्रीलांसर व साइड हसल करने वाले प्रोफ़ेशनल, दोनों काम पा सकते हैं। Fiverr (फ़ाइवर) पर अलग-अलग क्षेत्रों के प्रोफ़ेशनल्स उपलब्ध हैं, जैसे फ्रीलांस राइटर, ग्राफ़िक डिज़ाइनर, डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट, वॉइसओवर आर्टिस्ट, अकाउंटेंट, और सॉफ़्टवेयर प्रोग्रामर।
लागत: Fiverr (फ़ाइवर) पर अकाउंट बनाकर गिग पोस्ट करना फ्री है, लेकिन फ्रीलांसर से हर ऑर्डर पर 20% कमीशन ली जाती है। वहीं बायर को खरीदारी पर 5.5% की सर्विस फ़ीस देनी पड़ती है। 200 डॉलर से कम के ऑर्डर पर 3.50 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क भी लगता है।
फ़ायदे: कम शुरुआती लागत और आसान सेट-अप की वजह से छोटे प्रोजेक्ट जल्दी शुरू किए जा सकते हैं। साथ ही, अपने हुनर में निखार लाने या उसका दायरा बढ़ाने वाले फ्रीलांसर्स के लिए रेसोर्सेस भी उपलब्ध हैं।
नुकसान: बड़ा यूज़र बेस होने से क्लाइंट के लिए योग्य टैलेंट ढूँढना और फ्रीलांसर के लिए भीड़ में अपनी सेवाओं को अलग दिखाना मुश्किल हो सकता है। 20% कमीशन से फ्रीलांसर की कमाई पर भी काफ़ी असर पड़ सकता है।
Toptal (टॉपटाल)
Toptal (टॉपटाल) खुद को चुनिंदा इंडस्ट्री के सबसे योग्य फ्रीलांसर्स के लिए एक प्रीमियम मार्केटप्लेस के तौर पर पेश करता है। यह खासतौर पर वेब डेवलपमेंट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, और बिज़नेस कंसल्टिंग के लिए जाना जाता है। यह प्लेटफ़ॉर्म डेवलपर्स, डिज़ाइनर्स, प्रोडक्ट और प्रोजेक्ट मैनेजर, और मार्केटिंग एक्सपर्ट्स को टॉप-लेवल कंपनियों से जोड़ता है। यहाँ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, इनफ़ॉर्मेशन सिक्योरिटी, और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में लॉन्ग-टर्म कंसल्टिंग सेवाएँ देने वाले विशेषज्ञ भी मिल सकते हैं।
लागत: Toptal (टॉपटाल) का कोई सार्वजानिक रेट नहीं है। फ्रीलांसर को काम पर रखने की लागत उसकी लोकेशन और अनुभव के साथ-साथ प्रोजेक्ट की जटिलता, अवधि, और काम के तरीके (प्रति घंटा, पार्ट-टाइम, या फ़ुल-टाइम) पर निर्भर करती है।
फ़ायदे: फ्रीलांसर्स के लिए Toptal (टॉपटाल) कई स्टेप्स वाली एक सख्त स्क्रीनिंग प्रक्रिया अपनाता है। इसमें अंग्रेज़ी भाषा का टेस्ट, कौशल की समीक्षा, लाइव इंटरव्यू, और टेस्ट प्रोजेक्ट शामिल हो सकते हैं। प्लेटफ़ॉर्म के अनुसार अप्लाई करने वाले 3% से भी कम प्रोफ़ेशनल्स को स्वीकार किया जाता है। इससे क्लाइंट को बेहतर क्वालिटी वाला काम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
नुकसान: ज़्यादातर दूसरे प्लेटफ़ॉर्म की तुलना में इस साइट पर फ्रीलांसर आमतौर पर ज़्यादा रेट लेते हैं। इसलिए सीमित बजट वाले क्लाइंट या छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए यहाँ कम विकल्प होते हैं। कड़ी स्क्रीनिंग प्रक्रिया के चलते कम रेट लेने वाले कुशल फ्रीलांसर्स के लिए भी इस प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ना मुश्किल हो सकता है।
Upwork (अपवर्क)
Upwork (अपवर्क) के हिसाब से उनका फ़ोकस "आमतौर पर कंप्यूटर पर किए जाने वाले हर काम" पर है। वेब, मोबाइल और सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट, डिज़ाइन, और कॉपीराइटिंग यहाँ मिलने वाली सबसे लोकप्रिय फ्रीलांस सेवाओं में शामिल हैं।
लागत: बिज़नेस के लिए Upwork (अपवर्क) का Basic Plan (बेसिक प्लान) उपलब्ध है, जिसमें फ्रीलांसर को की गई पेमेंट पर 5% सर्विस फ़ीस लगती है और पूरे मार्केटप्लेस का एक्सेस मिलता है। Business Plus (बिज़नेस प्लस) में यह फ़ीस 10% तक हो सकती है। इसके साथ जाँचे-परखे टैलेंट का एक्सेस, डायरेक्ट मैसेजिंग, और एडवांस्ड सपोर्ट जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ भी मिलती हैं। नए कॉन्ट्रैक्ट पर अलग से इनिशिएशन फ़ीस भी लग सकती है।
फ्रीलांसर एक फ्री Basic (बेसिक) अकाउंट या फिर 19.99 डॉलर प्रति माह वाला Plus (प्लस) अकाउंट चुन सकते हैं। Plus (प्लस) अकाउंट में हर महीने ज़्यादा Connects (कनेक्ट्स) और अतिरिक्त टूल्स मिलते हैं। Connects (कनेक्ट्स) प्लेटफ़ॉर्म की वर्चुअल करेंसी हैं, यानी कि इनका इस्तेमाल किसी जॉब के लिए अप्लाई करने या अपनी प्रोफ़ाइल की विज़िबिलिटी बढ़ाने में किया जा सकता है। हर कॉन्ट्रैक्ट पर फ्रीलांसर्स से उनकी कमाई की 0% से 15% तक की सर्विस फ़ीस ली जाती है।
फ़ायदे: यहाँ एक घटता-बढ़ता कमीशन ढाँचा है, जो लगातार काम करने को रिवॉर्ड करता है। साथ ही, अनुभवी फ्रीलांसर्स और तरह-तरह के बजट और अलग-अलग क्षेत्रों में प्रोजेक्ट देने वाली कंपनियों का एक बड़ा वैश्विक समुदाय भी यहाँ मौजूद है।
नुकसान: यह साइट इतनी बड़ी है कि क्लाइंट्स के लिए कई फ्रीलांसर्स में से सही फ्रीलांसर चुनना मुश्किल हो सकता है। वहीं, काम और बेहतर विज़िबिलिटी पाने के लिए फ्रीलांसर्स को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ सकता है।
99designs (99डिज़ाइन्स)
जैसाकि इसके नाम से ही पता चलता है, 99designs (99डिज़ाइन्स) खासतौर पर फ्रीलांस डिज़ाइनर्स के लिए बनाया गया एक प्लेटफ़ॉर्म है। अपने प्रोजेक्ट की ज़रूरतों के बारे में क्लाइंट एक आसान ब्रीफ़ भरते हैं। इसके बाद, 99designs (99डिज़ाइन्स) की मदद से वे या तो संभावित फ्रीलांसर्स की सूची तैयार कर सकते हैं या फिर डिज़ाइन कॉन्टेस्ट शुरू कर सकते हैं, जिसमें पूरी कम्युनिटी अपने डिज़ाइन भेज सकती है।
लागत: किसी नए क्लाइंट के साथ काम शुरू करने पर डिज़ाइनर 100 डॉलर तक की "इंट्रोडक्शन फ़ीस" देते हैं। इसके अलावा, डिज़ाइनर के अनुभव के आधार पर 5% से 15% तक की प्लेटफ़ॉर्म लिस्टिंग फ़ीस भी लगती है। ये दोनों ही फ़ीस आमतौर पर कुल प्रोजेक्ट लागत में शामिल होती हैं। क्लाइंट 5% फ़ीस देते हैं, जिससे पेमेंट प्रोसेसिंग और कस्टमर सपोर्ट कवर हो जाते हैं। प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस अपने आप कोटेशन और इनवॉइस में शामिल हो जाती हैं।
फ़ायदे: 99designs (99डिज़ाइन्स) की टीम क्लाइंट को सही डिज़ाइनर से मिलाने में मदद मिलती है, जिससे योग्य प्रोफ़ेशनल्स को खोजना आसान हो जाता है। इसकी वैश्विक कम्युनिटी में डिज़ाइन की कई श्रेणियाँ और शैलियाँ उपलब्ध हैं।
नुकसान: आपको मिलने वाले डिज़ाइन की क्वालिटी काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि आपका ब्रीफ़ कितना स्पष्ट और विस्तृत है। अगर आपका प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है या उसकी ज़रूरतें अस्पष्ट हैं, तो सही डिज़ाइन ढूँढना मुश्किल हो सकता है। विकल्पों की भरमार से भी आप परेशान हो सकते हैं।
Truelancer (ट्रूलांसर)
Truelancer (ट्रूलांसर) एक फ्रीलांस मार्केटप्लेस है, जहां प्रोजेक्ट पोस्ट करके बिज़नेस अलग-अलग क्षेत्रों के फ्रीलांसर्स से प्रपोज़ल पा सकते हैं। यहाँ वेब डेवलपमेंट, ग्राफ़िक डिज़ाइन, कंटेंट राइटिंग, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एंट्री, वर्चुअल असिस्टेंस, और ट्रांसलेशन जैसी कई सेवाएँ उपलब्ध हैं। सीधे फ्रीलांसर खोजने के साथ-साथ क्लाइंट कॉन्टेस्ट भी शुरू कर सकते हैं। वे तय कीमत वाले सर्विस पैकेज भी खरीद सकते हैं।
लागत: Truelancer (ट्रूलांसर) पर क्लाइंट मुफ़्त में प्रोजेक्ट पोस्ट कर सकते हैं। हाँ, पैसे जमा करते समय चुने गए पेमेंट मेथड के आधार पर प्रोसेसिंग फ़ीस लग सकती है। फ्रीलांसर्स से उनके मेम्बरशिप प्लान के अनुसार बिल किए गए काम पर 8% से 10% तक की सर्विस फ़ीस ली जाती है। अतिरिक्त प्रपोज़ल्स और दूसरी सुविधाओं के लिए पेड मेम्बरशिप्स भी उपलब्ध हैं।
फ़ायदे: यह प्लेटफ़ॉर्म भारतीय फ्रीलांसर्स और बिज़नेस के लिए बेहद उपयोगी है। साथ ही, यह वैश्विक प्रोजेक्ट्स का एक्सेस भी देता है। इसका Safe Deposit (सेफ़ डिपॉज़िट) सिस्टम क्लाइंट की पेमेंट तब तक सुरक्षित रखता है, जब तक कि वह फ्रीलांसर के काम या पेमेंट रिक्वेस्ट को मंज़ूरी नहीं देता। Workstream (वर्कस्ट्रीम) के ज़रिए क्लाइंट और फ्रीलांसर मैसेज, फ़ाइल, और प्रोजेक्ट अपडेट एक ही जगह पर शेयर कर सकते हैं।
नुकसान: बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्मों की तुलना में कुछ क्षेत्रों में प्रोजेक्ट या अनुभवी फ्रीलांसर्स के विकल्प सीमित हो सकते हैं। ओपन मार्केटप्लेस होने के कारण प्रोफ़ाइलों और प्रपोज़ल्स की क्वालिटी भी ऊपर-नीचे हो सकती है। इसलिए काम देने या स्वीकार करने से पहले रिव्यू, पोर्टफ़ोलियो, पेमेंट कन्फ़र्मेशन, और प्रोजेक्ट की शर्तों को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी हो जाता है।
Guru (गुरु)
Guru (गुरु) एक वैश्विक फ्रीलांस मार्केटप्लेस है, जहाँ बिज़नेस भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फ्रीलांसर्स को खोज सकते हैं। यहाँ प्रोग्रामिंग, वेब डेवलपमेंट, डिज़ाइन, राइटिंग, ट्रांसलेशन, मार्केटिंग, बिज़नेस, फ़ाइनेंस, और इंजीनियरिंग समेत कई क्षेत्रों के प्रोफ़ेशनल्स उपलब्ध हैं। क्लाइंट मुफ़्त में जॉब पोस्ट करके प्रपोज़ल्स की तुलना कर सकते हैं। WorkRoom (वर्करूम) के ज़रिए वे प्रोजेक्ट, फ़ाइल, और कम्युनिकेशन भी मैनेज कर सकते हैं।
लागत: Guru (गुरु) पर क्लाइंट मुफ़्त में जॉब पोस्ट करने और फ्रीलांसर्स को काम पर रखने के साथ-साथ उन्हें मैनेज भी कर सकते हैं। हर इनवॉइस का भुगतान करते समय 2.9% की हैंडलिंग फ़ीस लगती है। कुछ पेमेंट मेथड का इस्तेमाल करने पर यह शुल्क कैशबैक के तौर पर वापस भी मिल सकता है। फ्रीलांसर्स के लिए Basic (बेसिक) मेम्बरशिप फ़्री होती है और इसमें 9% की जॉब फ़ीस लगती है। पेड मेम्बरशिप की कीमत 11.95 डॉलर से लेकर 49.95 डॉलर प्रति माह तक होती है। प्लान के अनुसार जॉब फ़ीस घटकर 5% तक हो सकती है। साथ ही, हर महीने आपको ज़्यादा बिड्स भी मिलती हैं।
फ़ायदे: Guru (गुरु) का SafePay (सेफ़पे) सिस्टम क्लाइंट और फ्रीलांसर, दोनों को पेमेंट प्रोटेक्शन देता है। काम शुरू होने से पहले शेयर्ड SafePay (सेफ़पे) अकाउंट में क्लाइंट पैसे जमा कर सकता है। काम की समीक्षा करने के बाद वह पेमेंट रिलीज़ कर सकता है। फ़िक्स्ड प्राइस, प्रति घंटे, और माइलस्टोन-आधारित काम के लिए प्लेटफ़ॉर्म लचीली पेमेंट शर्तें भी देता है। WorkRoom (वर्करूम) की मदद से प्रोजेक्ट पर बातचीत, फ़ाइल शेयरिंग, और प्रोग्रेस मॉनिटरिंग एक ही जगह से की जा सकती है।
नुकसान: मुफ़्त Basic (बेसिक) मेम्बरशिप में फ्रीलांसर्स हर महीने सिर्फ़ 10 जॉब्स के लिए ही कोट भेज सकते हैं। ज़्यादा बिड्स, बेहतर प्रोफ़ाइल विज़िबिलिटी, और कम जॉब फ़ीस के लिए पेड मेम्बरशिप लेनी पड़ सकती है। SafePay (सेफ़पे) का इस्तेमाल अनिवार्य नहीं होता। इसलिए काम शुरू करने से पहले फ्रीलांसर को यह पक्का कर लेना चाहिए कि क्लाइंट ने उसमें पैसे जमा करा दिए हैं। बड़े प्लेटफ़ॉर्म की तुलना में कुछ क्षेत्रों में प्रोजेक्ट या सक्रिय क्लाइंट की संख्या भी कम हो सकती है।
Freelancer.com (फ्रीलांसर डॉट कॉम)
Freelancer.com (फ्रीलांसर डॉट कॉम) एक बड़ा वैश्विक मार्किटप्लेस है, जहाँ 2,700 अलग-अलग श्रेणियों में प्रोफ़ेशनल्स उपलब्ध हैं। इसमें ट्रांसलेशन, एनिमेशन, डिजिटल मार्केटिंग, कानूनी सेवाएँ, वेब डेवलपमेंट, और ग्राफ़िक डिज़ाइन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
लागत: Freelancer.com (फ्रीलांसर डॉट कॉम) पर साइन-अप और पोस्ट करना फ्री है, लेकिन प्रोजेक्ट स्वीकार होने पर क्लाइंट एक सर्विस फ़ीस (कुल प्रोजेक्ट लागत का 3%) देते हैं। पूरे किए गए हर प्रोजेक्ट पर फ्रीलांसर प्लेटफ़ॉर्म को 10% कमीशन देते हैं।
फ़ायदे: कई श्रेणीयों और एक बड़े यूज़र बेस के चलते अलग-अलग बजट और जटिलता वाले प्रोजेक्ट के लिए क्लाइंट्स को आसानी से फ्रीलांसर्स मिल जाते हैं।
नुकसान: दूसरी साइटों की तुलना में यूज़र्स कमज़ोर सिक्योरिटी स्क्रीनिंग का ज़िक्र करते हैं। बड़ी संख्या में फ्रीलांसर्स की मौजूदगी से कड़ी प्रतिस्पर्धा पैदा हो सकती है, जिसके कारण कुछ श्रेणियों में रेट बहुत कम रखे जाते हैं।
इस बारे में और जानने के लिए आप इस वीडियो को देख सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर सबटाइटल्स ऑन कर लें (ऑटो जेनरेट)।
बेस्ट फ्रीलांसिंग साइट्स: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नंबर 1 फ्रीलांस वेबसाइट कौन सी है?
यूज़र्स की संख्या और उपलब्ध सेवाओं के आधार पर क्लाइंट्स और फ्रीलांसर्स, दोनों को Upwork (अपवर्क) कई तरह के विकल्प और भरोसेमंद सुविधाएँ देता है। हाँ, बेस्ट फ्रीलांसिंग साइट आपकी ज़रूरतों और योग्यताओं पर निर्भर करती है: Toptal (टॉपटाल) एक महँगा लेकिन बेहद खास मार्केटप्लेस है, जबकि 99designs (99डिज़ाइन्स) खासतौर पर डिज़ाइन से जुड़े काम के लिए उपयोगी साबित होता है। वहीं, Truelancer (ट्रूलांसर) और Guru (गुरु) खासतौर पर भारतीय फ्रीलांसर्स और बिज़नेस के लिए बढ़िया विकल्प साबित होते हैं।
नए फ्रीलांसर्स के लिए कौन-सा फ्रीलांसिंग प्लेटफ़ॉर्म सबसे अच्छा है?
अपना पोर्टफ़ोलियो बनाकर क्लाइंट खोजने की शुरुआत कर रहे फ्रीलांसर्स के लिए Fiverr (फ़ाइवर) एक बढ़िया विकल्प हो सकता है। कई दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर काम पाने के लिए हर प्रोजेक्ट के लिए अलग से प्रपोज़ल भेजना पड़ता है। दूसरी ओर, Fiverr (फ़ाइवर) पर फ्रीलांसर्स अपनी सेवाओं के आसान पैकेज बनाकर उन्हें सीधे बिक्री के लिए लिस्ट कर सकते हैं।
फ्रीलांसिंग कैसे शुरू करें?
फ्रीलांस बिज़नेस की शुरुआत भी किसी दूसरे बिज़नेस की तरह होती है। सबसे पहले अपना क्षेत्र और दी जाने वाली सेवाएँ तय कर लें। इसके बाद, अपनी आर्थिक ज़रूरतों और अनुमानित कमाई की योजना बनाने के लिए एक बिज़नेस प्लान तैयार करें। चुनिंदा फ्रीलांस वेबसाइटों पर प्रोफ़ाइल बनाने के साथ-साथ अपनी सेवाएँ और काम दिखाने के लिए एक पोर्टफ़ोलियो वेबसाइट बना लें। आखिर में, संभावित क्लाइंट्स तक पहुँचने के लिए अपनी सेवाओं की मार्केटिंग करना न भूलें।

